तेरापंथ युवक परिषद दिल्ली द्वारा पिछले सात वर्षों से भक्तामर स्त्रोत अनुष्ठान का भव्य एवं नियमित आयोजन विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। आचार्य महाप्रज्ञ जी एवं उपाध्याय यशोविजय जी की अमूल्य रचनाओं के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं को आस्था और श्रद्धा का बोध होता है। पवित्र भक्तामर स्त्रोत जैन परंपरा में आध्यात्मिक शक्ति और साधना का प्रभावशाली प्रतीक है।
इन अनुष्ठानों में भक्तगण सामूहिक रूप से भक्तामर स्त्रोत का सस्वर उच्चारण कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। शक्ति और साधना का यह अद्भुत संगम न केवल श्रद्धालुओं की मानसिक शांति और आत्म-विश्वास बढ़ाता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन भी करता है।
भक्ति और साधना का प्रतीक :
यह स्त्रोत भगवान ऋषभदेव के प्रति भक्ति और समर्पण का श्रेष्ठ अभिव्यक्ति है।
ईश्वरीय प्रभाव का साधक :
इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है।
सकारात्मक प्रभाव :
श्रद्धालुओं के जीवन में उत्साह, आत्मबल और संस्कारात्मक दृष्टिकोण का संचार होता है।
मोक्षमार्ग की कामना :
जैन परंपरा में भक्तामर स्त्रोत का प्रभाव कई बाधाओं को दूर करता है और साधक को आत्मिक समाधान की ओर प्रेरित करता है।
दिनांक – 3 अगस्त 2025 – स्थान – शास्त्री नगर, त्रिनगर
दिनांक – 3 अगस्त 2025 – स्थान – मालवीय नगर, ग्रीन पार्क
दिनांक – 4 अगस्त 2025 – स्थान – वसुंधरा, वैशाली
दिनांक – 14 सितंबर 2025 – स्थान – सावित्री नगर, महरौली
दिल्ली में आयोजित इन अनुष्ठानों में समाज के 1500+ श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर अपनी साधना और शक्ति को और प्रबल बनाया है। परिषद का यह अभिनव प्रयास न केवल समाज में आध्यात्मिक चेतना जाग्रत करता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, भक्ति और परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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